अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त अति श्रेष्ठ, भर्मित कर रहे पीठाधीश्वर
चार पीठधीश्वरों ने जिस प्रकार श्री रामलला जी की अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के मुहूर्त पर सवाल खड़े किए हैं, उसे लेकर न सिर्फ लोगों में आक्रोश है, बल्कि मुहूर्त निकालने वाले काशी के पंडित जी ने विस्तार से इसे सही बताते हुए विरोधियों को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि यह ज्योतिष शास्त्रानुसार है, ऐसे में विरोध करने वालों की किरकिरी तो हुई ही है। वहीं अब विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविन्द मिश्र जी ने भी मुहूर्त को ज्योतिषीय रूप से सही बताते हुए विरोधियों को आइना दिखा दिया है। डॉ. अरविन्द मिश्र जी के ज्योतिषीय आंकलन पर देखते हैं ये ख़ास रिपोर्ट।
विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविन्द मिश्र जी के अनुसार 22 जनवरी 2024 को होने जा रही प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त को लेकर सवाल उठा रहे शंकराचार्य एवं अन्य लोगों द्वारा गलत बताया जा रहा है। उन्हें मैं बताना चाहता हूं कि "ज्योतिष शास्त्र में दो प्रकार के मुहूर्त होते हैं। एक सामान्य मुहूर्त और दूसरा विशिष्ट मुहूर्त।
सामान्य मूहर्त-जिस मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्र आदि का विचार न किया जाए उसे सामान्य मुहूर्त कहते हैं। अर्थात चौघड़िया, अभिजित आदि।
विशिष्ट मुहूर्त-जिसमें मुहूर्त में जातक के राशि, नक्षत्र अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र आदि का विचार किया जाए उसे विशिष्ट मुहूर्त कहते हैं। जैसे विवाह, सेवाकर, वाहन क्रय, प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त आदि।
अब हम ज्योतिषीय दृष्टि से 22 जनवरी 2024 के प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त को देखें तो, 22 जनवरी को दिल्ली से निकलने वाले विख्यात पंचांग ब्रजभूमि और जोधपुर से निकलने वाले विख्यात पंचांग श्री चण्डमार्तंडनिर्णय सागर पंचांग एवं अन्य पंचांगों में भी श्री राम जी की प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त दिया गया है।
इस दिन के प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त की निम्न विशेषताएं हैं :-
1- 15 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो गए हैं और खरमास की समाप्ति हुई है। माघ मास प्रारंभ हो गया है।
2- इस दिन सभी विघ्न बाधाओं को समाप्त कर सफलता देने वाले सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत सिद्धि जैसे विशेष योग हैं।
3- प्राण प्रतिष्ठा के समय अभिजित योग है। इसी योग में प्रभु श्री राम जी का जन्म हुआ था। जो दोपहर 11:45 से 12:30 तक अभिजित मुहूर्त कहलाता है। इसी अभिजित मुहूर्त में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। इसके लिए किसी भी शुद्धशुद्धि आदि का विचार आवश्यक नहीं है।
4- प्राण प्रतिष्ठा के समय देवगुरु बृहस्पति की होरा है, जो प्राण प्रतिष्ठा के बेहद खास है।
5- प्राण प्रतिष्ठा के समय मेष लग्न है और लग्न में बृहस्पति षष्ठम में केतु, अष्टम में शुक्र, नवम में मंगल एवं बुध, दशम भाव में सूर्य और एकादश भाव में शनि स्वभाव के होकर बैठे हैं, बारहवें भाव में राहु विराजमान हैं।
इस लग्न को देखें तो लग्न में बृहस्पति भाग्य स्थान का स्वामी होकर बैठा है और लग्नेश मंगल भाग्य स्थान में बैठा है। बृहस्पति और मंगल एक दूसरे के स्थान में बैठे हैं। सूर्य दशम स्थान में बैठा है, शनि स्वभाव एकादश स्थान में बैठा है। अतः यह लग्न बेहद बलशाली और भाग्यशाली है एवं सिद्धि कारक रहेगी।
6- प्राण प्रतिष्ठा के समय सोमवार का दिन, द्वारदशी तिथि, मृगशिरा नक्षत्र, कि ऐंद्र नामक योग है। इस योग में किया गया कार्य बेहद शुभ कारक होता है।
7- प्राण प्रतिष्ठा के समय चंद्रमा अपनी उच्च राशि में विराजमान है, जो यजमान श्री अनिल मिश्र जी की राशि मेष के अनुसार धन भाव का है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की जन्म राशि वृश्चिक के अनुसार सप्तम भाव का चंद्रमा है। जो अति श्रेष्ठ है।
अतः प्राण प्रतिष्ठा मुहुर्त पर उंगली उठाने वाले शंकराचार्य एवं अन्य शायद ज्योतिष जानकारी नहीं रखते हैं अथवा वे लोगों को गुमराह एवं भ्रमित कर रहे हैं और लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्हें अनर्गल भाषा से बचते हुए अपने पद कि गरिमा कायम रखनी चाहिए।
विख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविन्द मिश्र जी द्वारा दिए गए तर्क संगत जवाब के बाद श्री रामलला कि प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने वालों को सटीक जवाब मिल गया है, शायद अब उनको अपनी गलती का अहसास हो जाय और वो खुद को श्रेष्ठ साबित करने कि बजाय इस महान और ऐतिहासिक कार्य में अहंकार को एक तरफ रखकर पुनीत कार्य के सहभागी बने। अन्यथा प्रभु श्री राम उन्हें उनके ठिकाने तक ही सीमित कर देंगे और जनता भी अब सब समझ चुकी है। जाय श्री राम!




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें