जानिए इस वर्ष कब मनाई जाएगी मकर संक्रान्ति?

वर्ष 2024 में मकर संक्राति को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं, आखिर मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 को, इसे लेकर असमंजस की स्थिति निर्मित है। लेकिन आपकी इस समस्या और जिज्ञासा का समाधान प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविन्द मिश्र ने खोज निकाला है। उनके ज्योतिषीय गणितानुसार जानते हैं मकर संक्रांति की सटीक जानकारी।  

सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की रात्रि में 2: 44 मिनट पर आएगा। अतः मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2024 को सोमवार को मानेगा। शनि सूर्य पुत्र है। वह सूर्य को अपना शत्रु मानते हैं । मकर राशि एवं कुंभ राशि के स्वामी शनि है। सूर्य दो माह में अपने पुत्र शनि के घर में रहने आते हैं । सूर्य 14 मार्च को दोपहर 12:36  मिनट पर मीन में प्रवेश करेगा । वर्तमान में सूर्य दक्षिणायन चल रहे हैं । कर्क राशि में प्रवेश के साथ सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं और मकर राशि मैं प्रवेश तक रहते हैं। इस समय सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि भी कहा जाता है। मकर राशि में प्रवेश के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाएगा। उत्तरायण काल में सभी शुभ कार्य करना शुभ रहता है। मकर से कर्क राशि प्रवेश तक 6 माह उत्तरायण काल रहेगा। 15 जनवरी को प्रात स्नान, दान आदि का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य से संबंधित गुड़ और शनि से संबंधित तिल की बनी हुई वस्तुएं गरीबों को दान की जाती हैं। चावल और उरद की दाल की खिचड़ी खाने का विशेष महत्व है। घर के बुजुर्गों को खिचड़ी, गजक, गर्म वस्त्र, दक्षिणा आदि घर के बुजुर्गों को दान स्वरूप देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। वैसे तो हर महीने सूर्य संक्रांति होती है। जब सूर्य एक राशि को छोड़ दूसरी राशि में जाता है। उसे संक्रांति कहा जाता है। लेकिन मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन पतंगें उड़ाई जाती है। मकर संक्रांति पूरे देश में बड़ी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ कई नामों से मनाई जाती है।

आपको बतादें महाभारत में पितामह भीष्म ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण सूर्य का इंतजार किया। अर्थात मकर संक्रांति के बाद ही उन्होंने अपने प्राण त्यागे। क्योंकि कहा जाता है कि दक्षिणायन में यदि किसी की मृत्यु होती है, तो वह मृत्यु लोक में पुनः जन्म लेकर आता है। और यदि उत्तरायण में किसी की मृत्यु होती है तो वह स्वर्ग लोक को जाता है या मुक्त हो जाता है। इस दिन खिचड़ी का मुख्य रूप से दान होता है। चावल चंद्रमा के लिए और उड़द शनि के लिए होते हैं। गुड़ सूर्य के लिए तिल शनि के लिए होते हैं। यदि इस दिन गंगा स्नान अथवा किसी पवित्र सरोवर में स्नान किया जाए तो महान पुण्य प्राप्त होगा। गंगा में स्नान के बाद गंगा में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से महान पुण्य प्राप्त होता है। यदि आप गंगा स्नान को नहीं जा सकते हैं, तो घर पर प्रातःकाल पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।



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