Agra News : जानिए क्या श्री गणेश विसर्जन शास्त्र सम्मत है?
ॐ गच्छ त्वं भगवन्नग्ने, स्वस्थाने कुण्डमध्यतः।
हुतमादाय देवेभ्यः, शीघ्रं देहि प्रसीद मे॥
गच्छ- गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थाने परमेश्वर।
यत्र ब्रह्मादयो देवाः, तत्र गच्छ हुताशन॥
यान्तु देवगणाः सर्वे, पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्ध्यर्थं, पुनरागमनाय च॥
मनोहर समाचार, आगरा। वर्तमान समय में श्री गणेश विसर्जन को लेकर कुछ विचार आ रहे हैं कि हमें गणेश जी का विसर्जन नहीं करना चाहिए। इस संबंध में मैं आपको बता देना चाहता हूं कि "हम कोई भी पूजा करते हैं, कोई भी अनुष्ठान करते हैं, तो श्री गणेश जी सहित सभी देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और पूजा समापन होने पर आवाहित देवताओं को विदा किया जाता है। श्री गणेश जी को श्री गणेश चतुर्थी को जब लोग स्थापित करते या बिठाते है। तब हम उनका आह्वान करते हैं, जिससे मूर्ति में भगवान श्री गणेश जी हमारा भाव भरा आमंत्रण पा कर सूक्ष्म रूप में मूर्ति में प्रतिष्ठित हो कर हमारी पूजा, भोग, प्रसाद ,ग्रहण करते हैं। जैसे ही हमारे मन में उनको विसर्जन करने का भाव आता है वैसे ही वे उस मूर्ति में से चले जाते है। उसके बाद वह सिर्फ एक मूर्ति ही रह जाती है, जिसको विसर्जन कहा जाता है।"
आपको बतादें गणेश जी को बिठाना और उनकी अनंत चतुर्दशी तक पूजा करना, तत्पचाल विसर्जन करना कोई भी गलत कार्य नहीं है। यह शास्त्र सम्मत है। इससे पूरे देश में एक धार्मिक वातावरण बनता है। युवा, बच्चे ,बुजुर्ग सभी गणेश जी को बिठाकर पूजा कर अपने को बड़भागी अनुभव करते हैं। विशेष कर बच्चों में बेहद खुशी एवं उल्लास रहता है। इसलिए पूरे देश में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद
डॉ. अरविन्द मिश्र, संजय प्लेस आगरा
मो. 9412343560


जय श्री गणेश
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