Agra News : भगवान शिव के 12 विग्रहों को कहा जाता है ज्योतिर्लिंग : पंडित गरिमा किशोरी जी

मनोहर समाचार, आगरा। श्री गणेश सेवा समिति की  ओर से तोता का ताल स्थित श्री खेमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंगो की कथा सुनाई

पंडित गरिमा किशोरी जी ने सातवें दिन कहा कि "ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जुड़ी कथा इस प्रकार है। नर और नारायण नामक दो ऋषि जिनको भगवान श्री विष्णु का अवतार माना जाता है, उन्होंने एक बार अपनी तपस्या से भगवान शिवजी को प्रसन्न कर लिया। जब भगवान शिव प्रकट हुए तो नर और नारायण की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए वहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करने का वचन दिया। द्वादश ज्योतिर्लिंगों से जुड़ी शिवपुराण के अनुसार भगवान लोक कल्याण के लिए लिग के रूप में वास करते हैं और भगवान शिव के बारह विग्रहों को द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।"

भारतवर्ष में यह 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं । इनमें सर्वप्रथम श्री सोमनाथ जी का स्मरण किया जाता है । श्रावण माह में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ गुजरात, मल्लिकार्जुन आंध्र प्रदेश, महाकालेश्वर मध्य प्रदेश, ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश, केदारनाथ उत्तराखंड, भीमाशंकर महाराष्ट्र, विश्वनाथ उत्तर प्रदेश, ‌र्त्यंबकेश्वर महाराष्ट्र, वैद्यनाथ झारखंड, रामेश्वर तमिलनाडु व घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के संभाजी नगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग को घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। इनके दर्शन मात्र से इंसान मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है।

समारोह के समापन पर आरती व अरदास के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। भजन गायक बलवीर सिंह बल्लो ने भगवान शिव के भजन सुनाए। इस अवसर पर  पंडित विद्यासागर तिवारी ने भगवान शंकर और शिव महापुराण की विधीवत पूजा अर्चना करवाई। 

इस अवसर परीक्षित अजय सुनीता माहौर मुख्य रूप से स्वामी गुरमुख दास उदासीन, दास दीपक उदासीन, समाजसेवी श्याम भोजवानी, आलोक पंडित, महावीर भाई, नंदलाल छत्तानी, शंकर लाल माहौर, मनोज सिखरवार, आनंद नोतनानी, मनोज तीर्थानी आदि मौजूद रहे।



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