AGRA : खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमी अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे लखनऊ, विशेष सचिव के समक्ष रखी बात
−प्रदेश सरकार के एफएसडीए विभाग की अपर आयुक्त एवं विशेष सचिव रेखा एस चौहान से मिलने पहुंचे उद्यमी
−चैंबर आफ फूड प्रोसेसिंग एसोएसिएशन और उप्र स्पाइसेस मैन्युफैक्चरिंग एसोएसिशन ने दिया ज्ञापन
आगरा। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार की जा रही कार्यवाही और भारतीय मसाले के विभिन्न उत्पादों पर लगी रोक के विरोध में आगरा मंडल के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े उद्यमियों के 18 प्रतिनिधियों ने लखनऊ में एफएसडीए विभाग की अपर आयुक्त् एवं विशेष सचिव के समक्ष अपनी पीड़ा रखी।
लखनऊ स्थित कार्यालय पर विशेष सचिव रेखा एस चौहान से चैंबर आफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन एवं उप्र स्पाइसेस मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से भेंट की एवं ज्ञापन सौंपा।
चैंबर आफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष राजकुमार भगत ने बताया कि "वर्तमान में मसाला उद्योग एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु आग्रह पत्र विशेष सचिव को सौंपा गया। हाल ही में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा कई नमूने एकत्रित किए गए और सभी मसाला नमूनाें में कीटनाशक अवशेष की उपस्थिति अनुमति सीमा से अधिक रिपोर्ट की गई। जबकि कोई भी निर्माता मसालों में बाहरी रूप से कीटनाशक नहीं मिलाता और सभी निर्माता कीटनाशक के प्रत्यक्ष उपयोग के कानूनी आदेश का ईमानदारी से पालन करते हैं।"
किसानों द्वारा कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है और इस प्रक्रिया को किसी भी एजेंसी द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है। कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों का कोई परीक्षण नहीं किया जाता। लगभग सभी कृषि उपज बाजार समितियों के माध्यम से उपयोगकर्ता बाजार में प्रवेश करती हैं, जहां मसाला निर्माता इन वस्तुओं को कच्चे माल के रूप में खरीदते हैं।
एफएसएसएआई ने कीटनाशक अवशेषों के लिए कुछ कड़े मानक तय किए हैं। सरकार से अनुरोध है कि एपीएमसी में वही कृषि उपज बिक्री हेतु उपलब्ध कराई जाये जो मानकों पर खरी उतरे। कृषि में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों का खाद्य उद्योग पर प्रभाव न पड़े। यह समस्या सिर्फ़ मसालों तक ही सीमित नहीं है, यह अन्य खाद्य निर्माताओं के लिए भी चिंता का विषय है।
उपाध्यक्ष नितिन गोयल ने बताया कि "जांच के बाद इसकी सूचना ब्रांडो के नाम के साथ मीडिया के माध्यम से देश भर में प्रसारित होने से उद्योग पर काफी कुप्रभाव पड़ा है।"
प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि जब तक कृषि में कीटनाशक के अत्याधिक उपयोग की समस्या का समाधान ना हो तब तक खाद्य उत्पादों में कीटनाशक अवशेष एमआरएल से अधिक पाए जाने पर कार्यवाही ना हो।
महामंत्री अनुज सिंघल ने बताया कि उद्यमियों की बात सुनने के बाद विशेष सचिव ने राहत के लिए समय देने की बात कही और साथ ही आश्वस्त किया कि परिणाम सामने आने तक रिपोर्ट को विभागीय स्तर पर ही रखा जाएगा। बाकि लिये गए नमूनों का परीक्षण चल रहा है। जो भी परिणाम आएंगे उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार होगी। इस संदर्भ में कृषि मंत्रालय से भी परामर्श लिया जा रहा है। किसानों को भी जागरुक करेंगे। उन्होंने कहा है कि व्यापारी अपने स्तर से गुणवत्ता की जांच करके ही माल को खरीदें।
इस अवसर पर चैम्बर ऑफ़ फ़ूड प्रोसेसिंग एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष राजकुमार भगत, महासचिव अनुज सिंघल, उपाध्यक्ष नितिन गोयल, सचिव सिद्धार्थ अग्रवाल, विकास चतुर्वेदी, अभिषेक चौरसिया,नितिन वार्ष्णेय हाथरस, विशाल अग्रवाल, उत्तर प्रदेश स्पाइसेस मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल में सुदीप गोयनका, संदीप बोस, हिमांशु, अरून गुप्ता,एसपी चौधरी शामिल थे।


Good
जवाब देंहटाएं