एनडीए को झटके पर झटके दे रहा इंडिया गठबंधन
लोकसभा चुनाव में करारी मात खाने के बाद अभी भी भाजपा के दिन नहीं बहुरे हैं। 4 जून 2024 से शिकस्त का शुरू हुआ सिलसिला अभी भी लगातार बदस्तूर जारी है। चार राज्यों में हुए विधानसभा के उप चुनावों में 13 सीट में से भाजपा महज 2 ही सीट जीत पाई। सबसे बड़ी बात तो ये रही कि धर्म की दुहाई देने वाली भाजपा लोकसभा में अयोध्या जहां श्रीराम मंदिर बनवाया उस सीट को हार गई। तो वहीं इस उप चुनाव में हरिद्वार और बद्रीनाथ जैसे धार्मिक तीर्थों पर भी भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा।
लगातार गिर रहे भाजपा के जनाधार ने भाजपा को अधिक ऊंचे उड़ने, बड़े बोल बोलने और जमीनी स्तर पर काम न करने की सजा दी है। महज धार्मिक उन्माद उत्पन्न करने से जनता साथ नहीं देगी, कुछ जनता के लिए करना भी पडेगा। भाजपा के अगर 10 शीर्ष नेताओं को छोड़ दें तो देशभर में सभी भाजपा और एनडीए के नेता मलाई मार रहे हैं। इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता। केन्द्र की कार्य योजनाओं पर मिट्ठू मियां बने ये नेता खुद के दम पर किसी भी जन सरोकार के कार्य करने में न सक्षम हैं और न करना चाहते हैं। यही बजह भाजपा को ले ढूबी।
एनडीए को धरातल पर उतर कर कार्य करने होंगे, अब तब जगेगा जनता में विश्वास। दूसरों पर दोषारोपड़ करना बहुत आसान है, कभी अपने गलेवान में झांक लेना चाहिए। देश की जनता ने 10 वर्ष दिए विकास के लिए महंगाई करने के लिए नहीं। अकूत जीएसटी कलैक्शन के बाद भी जनता को महंगाई में कोई राहत नहीं। भ्रष्टाचार पर सरकार का अंकुश नहीं। कानून पारदर्शी नही। सिस्टम का कोई तौर तरीका नहीं। इस सच को भाजपा झुठला नहीं सकती।
पार्टी के अंदर चापलूसों ने पार्टी की लुटिया ढुबा दी। धरातल पर कोई काम हो या न हो, लेकिन ऊपर रिपोर्ट जबरदस्त पहॅुचती है। वहीं ऊपर बैठे पदाधिकारी, मंत्री आंख बंद कर उस रिपोर्ट पर उसकी वाहवाही कर जनता के अरमानो ंपर पानी फेर देते हैं। देश में गिरते पुल, धंसकते रोड, घटनाएं, दुर्घटनाएं अपराध, रिश्वत, भ्रष्टाचार, सामाजिक उन्माद और न जाने कितनी विसंगतियों ने जन्म ले लिया है। इस ओर कोई ध्यान ही नहीं है। सत्ता सुख से जागने का समय है और जनता के लिए काम करने का भी।
भाजपा अभी भी नहीं जागी तो आने वाले अगले महीनों में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। इसकी जिम्मेदार स्वयं भाजपा होगी। क्योंकि शीर्ष नेतृत्व को धरातल की हकीकत जानने का समय ही नहीं है। जब तक जनता और उससे जुड़े विकास के कार्य नहीं होंगे, तब तक ये हार का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों दिशा में महा असफल रहा एनडीए बेशक अपने मुंह मिट्ठू बनता रहे, लेकिन सच आखिर सच है। लोगों को इलाज नहीं, शिक्षा व्यवसाय है, रोजगार पूरी तरह खत्म हैं, पेपर लीक हो रहे हैं। युवाओं से परीक्षा के नाम पर लूट मची है। क्या इसे शीर्ष नेतृत्व देखने में असफल है। अगर है, तो जीतना उतना ही मुश्किल है। ये देश जनता से है, सरकारों से नहीं और इसका अंदाजा एनडीए को भलीभांति हो चुका है।




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