99 के फेर में बहुत कुछ भूल रही कांग्रेस और राहुल!

 -1984 के बाद से कांग्रेस को नहीं मिला पूर्ण बहुमत

-2004 से 2014 तक वैशाखी पर चली मनमोहन सरकार

-2014 के बाद 100 का आंकड़ा छूने में कांग्रेस का निकला दम

वर्तमान में 99 सीट लाने वाली कांग्रेस पार्टी ऐसे खुशी जाहिर कर रही, मानो उसने कुबेर का खजाना हासिल कर लिया हो। लेकिन शायद उसे ये याद नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में कांग्रेस को मिली सिम्पैथी के चलते राजीव गांधी 404 सीट पाकर प्रधानमंत्री बने। 

1989 के लोकसभा चुनाव

लेकिन अगले ही पल 1989 के लोकसभा चुनाव जो राजीव गांधी के नेतृत्व में लड़ा गया महज 197 पर सिमट गई और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। उसके बाद वीपी सिंह जनता दल से प्रधानमंत्री 143 सीट जीतने और भाजपा के 85 सीट के समर्थन से बने। लेकिन बाद में भाजपा द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद 1991 में पुनः लोकसभा चुनाव हुए। 

1991 के लोकसभा चुनाव

वीपी सिंह की सरकार गिरने के बाद 1991 में पुनः लोकसभा चुनाव हुए। जहाँ कांग्रेस 232 और भाजपा 120 पर रही, राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने गठबंधन से पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 

1996 के लोकसभा चुनाव

1996 में हुए लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस को 140 और भाजपा को 161 सीटें मिलीं जहां अटल बिहारी बाजपेई 13 दिन के लिए पीएम बने और लगातार तीन प्रधानमंत्री बदले। 

1999 के लोकसभा चुनाव

1999 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 180 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस महज 114 सीटों पर ही सिमट गई। जहां भाजपा ने गठबंधन से सरकार बनाकर अटल जी ने पूरे पांच साल कार्य किया। 

2004 के लोकसभा चुनाव

2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 145 सीटें आई तो भाजपा की 138 सीटें रहीं और कांग्रेस ने सपा, बसपा और लेफ्ट के सहयोग से सरकार बनाकर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। 

2009 के लोकसभा चुनाव

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 206 और गठबंधन सहित 262 सीटें वहीं भाजपा को 116 तो राजग को 159 सीटें मिली और कांग्रेस ने एक बार फिर सपा, बसपा के बाहर से मिले समर्थन से सरकार बनाई। 

2014 के लोकसभा चुनाव

2014 लोकसभा की आंधी ने कांग्रेस को बुरी तरह धराशायी किया। एनडीए ने 336 तो भाजपा ने 282 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। जहां एनडीए से पहली पार नरेन्द्र मोदी ने बड़ी जीत के साथ पीएम पद सम्हाला।

 2019 के लोकसभा चुनाव

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटें और एनडीए ने 352 सीट जीतकर कांग्रेस को 52 सीट पर समेट विपक्ष ही खत्म कर दिया। ये आंकड़े कांग्रेस को देखने चाहिए।  

2024 के लोकसभा चुनाव

2024 में 99 सीट जीतकर कांग्रेस ऐसे दिखावा कर रही है मानो ब्रह्माण्ड जीत लिया, जबकि पिछले तीन दशक से वो बहुतम का आंकड़ा तक नहीं छू पाई है और 2014 से 100 का। एक राष्ट्रीय पार्टी जिसने 60 साल सत्ता चलाई वो 99 पर आसमान उठा रही है, इसे अतिशयोक्ति ही कहेंगे। जबकि भाजपा अकेले 240 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। 

वहीं दूसरी ओर 2024 में भाजपा ने मोदी क नेतृत्व में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और 240 सीटों पर जीत हासिल की जो कि कांग्रेस के 1984 के बाद से ये आंकड़ा उसके लिए बड़ी चिंता का विषय है। कांग्रेस 240 का आंकड़ा 1989 से लेकर आज तक नहीं छू पाई। पिछले एक डेढ़ दशक से तो 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। उस पर 2024 में आई 99 सीट जीत खुद को तुर्रम खां समझने वाली कांग्रेस के सामने भाजपा अकेले दम पर 240 जीत कर लाई, जबकि कांग्रेस इंडिया गठबंधन की बैशाखी पर सवार होकर 99 लाई। 

इस पूरी 1989 से लेकर 2024 तक कांग्रेस के आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस कहां खड़ी है और वर्तमान में 99 सीट जीतकर अहंकार में ढूब रही है, हिन्दुओं को राहुल गाली दे रहे हैं। देश विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे हैं, सनातन धर्म का विरोध कर रहे हैं। इस मानसिकता को क्या कहेंगे? ये बात सच है कि 99 के फेर में पड़ी कांग्रेस अपने भूतकाल से अनजान है। ऐसा न हो ये अहम आने वाले समय में कांग्रेस की नींव ही हिला दे, अभी भी वक्त है, इस देश की संस्कृति, हिन्दुओं की सहशीलता और धर्म की प्रगाढ़ता को आत्मसात कर लें। 

वी पी शर्मा 

(लेखक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

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