Manohar Samachar : जानिए श्राद्ध पक्ष की मातृ नवमी का महत्व, तिथि और संपूर्ण विधान
-ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविन्द मिश्र के द्वारा विशेष महत्वपूर्ण जानकारी
मातृ नवमी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है। 15 सितंबर को मातृ नवमी है। यह पितृपक्ष का एक महत्वपूर्ण दिन है, जो विशेष रूप से विवाहित माताओं, बहुओं और बेटियों के श्राद्ध के लिए समर्पित है। इस दिन सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहते हैं और माना जाता है कि इस तिथि पर श्राद्ध करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
मातृ नवमी का महत्व
दिवंगत महिलाओं का सम्मान: इस दिन मृत विवाहित महिलाओं, जैसे माँ, बहन या बेटी, का श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
पारिवारिक समृद्धि:
ऐसा माना जाता है कि मातृ नवमी पर महिला पूर्वजों के निमित्त पूजा और दान-पुण्य करने से घर में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य बढ़ता है।
सौभाग्यवती श्राद्ध:
इस तिथि को सौभाग्यवती श्राद्ध के रूप में भी जाना जाता है, जो सौभाग्यवती महिलाओं के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है।
श्राद्ध विधि
दीपक और तर्पण: घर की दक्षिण दिशा में हरा वस्त्र बिछाकर तिल के तेल का दीपक जलाएं और जल में मिश्री व तिल मिलाकर तर्पण करें।
भोजन और दान:
ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं, जिसमें लौकी की खीर, पालक, मूंगदाल और हरे फल शामिल हो सकते हैं।
दान दक्षिणा:
भोजन कराने के बाद धन और दक्षिणा दान कर ब्राह्मणों को विदा करें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह तिथि
गरुड़ पुराण और शकुन शास्त्र के अनुसार, सौभाग्यवती माता के श्राद्ध की तिथि अलग से बताई गई है और यदि यह श्राद्ध नवमी को न किया जाए तो पितृ प्रेत योनि में भटकते रहते हैं। इस दिन श्राद्ध न करने पर परिवार में अशांति, दरिद्रता, दुख और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ज्योतिषाचार्य
डॉ. अरविन्द मिश्रा
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
भविष्य बनाओ ज्योतिष एवं वास्तु संस्थान शॉप न 21, ब्लॉक न.25 ग्राउंड फ्लोर,( निकट शहीद स्मारक पार्क) संजय प्लेस आगरा
संपर्क सूत्र: 9412343560
बहुत सुन्दर
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