Manohar Samachar : बाबा श्रीमनकामेश्वर रामलीला महोत्सव के सातवें दिवस वनवास और केवट प्रसंग का भक्तिपूर्ण मंचन

“माते! सुनु सिय बिनय हमारी। करहु कृपा दीन दुःख निवारी॥”

मनोहर समाचार, आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड में चल रहे बाबा श्रीमनकामेश्वर रामलीला महोत्सव के सातवें दिवस रविवार का मंचन भावविभोर कर देने वाला रहा। लीला का आरंभ कोप भवन प्रसंग से हुआ, जहाँ माता कैकयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर श्रीराम को वनवास और भरत को राज्य देने का निवेदन किया। इस प्रसंग ने दर्शकों के हृदय में गहरी करुणा और भक्ति का संचार किया।

इसके बाद वनवास लीला का मंचन हुआ। राजमहल से निकलते समय श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी के करुण दृश्यों ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। नगरवासियों द्वारा श्रीराम को रोकने के प्रयत्न और माताओं की वेदनापूर्ण विदाई ने वातावरण को करुणा और प्रेम से भर दिया। “राम नाम की ध्वनि” से सम्पूर्ण परिसर गूंज उठा।

संध्या का मुख्य आकर्षण रहा केवट प्रसंग। जब प्रभु श्रीराम गंगा तट पर पहुँचे और गंगा पार करने की इच्छा प्रकट की, तब निषादराज केवट का भावपूर्ण संवाद मंचित किया गया।

“केवट मागै नाव ना पाई।

राम कृपा करि दीन्हि बनाई॥”

केवट का यह अटूट प्रेम और भक्ति देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। उसने भगवान के चरण धोकर परिवार सहित पान किया और नन्हीं नाव को प्रभु की सेवा में अर्पित कर दी। इस प्रसंग ने यह संदेश दिया कि भगवान केवल भक्ति और सच्चे भाव से ही प्रसन्न होते हैं।

इस अवसर पर श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि "वनवास और केवट प्रसंग हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, मर्यादा, धर्म और भक्ति का मार्ग ही सच्चा पथ है। केवट का उदाहरण हमें बताता है कि सच्चा प्रेम और श्रद्धा ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सरल साधन है।"

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने कहा कि "रामलीला के ये प्रसंग हर मनुष्य को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करते हैं। भगवान के प्रति निष्कपट प्रेम ही वास्तविक पूजा है। रामलीला के मंचन से समाज को मर्यादा और सत्य का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।" उन्होंने बताया कि "महोत्सव के आगामी दिवसों में भरत मिलाप और लंका दहन जैसे प्रमुख प्रसंगों का मंचन होगा, जिनकी प्रतीक्षा श्रद्धालुओं को है।" महोत्सव में दिगनेर वासी महेन्द्र गुप्ता , छुट्टन चौहान, तूफ़ान सिंह, रिषी परिहार, प्रेमवीर पचौरी आदि द्वारा आगरा से आए लोगों का स्वागत किया जा रहा है।



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