भारत की बांग्लदेश से तुलना करने वाले मानसिक रोगी और दोगलेपन के शिकार
-शर्म भी ऐसी भाषा के आगे हो जाएगी शर्मसार
-देश के टुकड़े करने वाला देश का गद्दार
भारत की सम्प्रभुता, अनेकता में एकता, अखण्डता, अक्षुणता, सर्वश्रेष्ठता, मानवता, सार्वभौमिका, सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता, अधिकारों की मौलिकता, नैतिकता, विश्व कल्याण और मानवजाति के साथ जीव जगत के प्रति उदारता, ये हिन्दुस्तान की पहचान है। जो भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। कोई नापाक हरकत और सोच भारत की सांस्कृति विरासत की परछाईं को स्पर्श भी नहीं कर सकता और न देश का कोई सच्चा नागरिक ये करने देगा। हां जिन्हें भारत की सनातन संस्कृति, उसकी तरक्की, विश्व में बड़ती शक्ति और धार्मिक भक्ति से अगर द्वेष है, तो निश्चित रूप से ऐसा दोगला इंसान, मानसिक कुपित बीमारी से ग्रसित देशद्रोही भारत की तुलना बांग्लादेश, पाकिस्तान, नापाक और विध्वंसकारियों से अवश्य करेगा। क्योंकि भारत के विरोधाभास का जहर उसके खून में है।
भारत माता की कोख से पैदा होने वाला प्रत्येक भारतवासी देश के लिए बलिदार हो सकता है, लेकिन देश के खिलाफ विद्रोह की भावना नहीं जगा सकता। ऐसा करने वाला व्यक्ति भारत के लिए किसी जयचंद से कम नहीं। ऐसा देश में घटित हो रहा है, इसलिए हम ये बता देना चाहते हैं कि इस देश की मिट्टी में पैदा होकर, यहां का नमक और अन्न खाकर जो नमकहरामी करेगा, क्या उसे जीवन में शांति, ख्याति, मुक्ति और देशभक्ति के साथ तिरंगे की भक्ति मिल सकेगी। ऐसे नापाक इंसानों को ये देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
तमाम सत्ता स्वार्थ के दलालों को ये कहते सुना है कि भारत से तो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी अच्छे हैं। अर्थात ऐसे दोगले इंसानों को अपने बाप से बाप कहने में शर्म महसूस होती है, दूसरों और मतलब के लिए गधों को बाप बनाना कोई इनसे सीखे। खाते हैं इस देश का और बजाते हैं, दूसरे देशों का, गजब के लोग हैं। ऐसे लोगों को क्या यहां रहने का अधिकार है। उन्हें तो स्वतः ही नापाक लोगों के पास जाकर भारत से जंग लड़नी चाहिए सामने से, पींठ में छुरा घोंपने से बहादुर नहीं जयचंद की उपाधि से नवाजा जाता है।
भारत में दयाकापात्र निवास करने वाले दोगले देश विरोधी अराजक इंसान ये भली भांति समझ लें कि उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। देश की जनता एकता और भाईचारे की ताकत से उन्हें एक दिन उनके अंजाम तक पहॅुचा ही देगी। वक्त रहते ऐसे लोग सुधर जाएं, अन्यथा वक्त उन्हें सुधारेगा नहीं, सीधा कर देगा। ये देश किसी की जागीर नहीं है। ये भारवासियों के सपने का भारत है। यहां उनके प्राण बसते हैं, आत्मा बसती है, मां भारती बसती है।
अफगानिस्तान में तख्ता पलटा, पाकिस्तान में तख्ता पलटा, नेपाल में तख्ता पलटा और अब बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्ता पलट हुआ। इन चारों जगह पर कहीं न कहीं गलत ताकतों ने कब्जा जमाया या किसी ने जमाने पर विवश कर दिया। यूक्रेन और रूस में युद्ध, इजराइल और हमास, तुर्की, ईरान में युद्ध और इसकी बजह से होने वाला विनाश, जिसकी भरपाई दशकों में भी असम्भव है।
नफरत, देशद्रोह, विद्रोह, आतंकवाद, जिहाद, धोखेबाजी, वैमनष्यता, अलगाववाद, धार्मिक उन्माद, इंसानियत पर प्रहार, कट्टरवाद, जुल्म और सत्ता के लालच में नापाक सपने देखने वाले एक दिन मिट्टी में मिल जाते हैं। दूसरी ओर सर्वे भवन्तु सुखिनः, विश्व शांति, प्रेम और जीव जगत के साथ मानव कल्याण की भावना रखने वाले देश और इंसान सर्वश्रेष्ठता को प्राप्त करते हैं। इस बात का इतिहास गवाह है। इसलिए उन ताकतों को सुधरने, अपनी आत्मा में झांकने और देश के लिए मर मिटने की ललक पैदा करने की जरूरत है।
भारत में प्रधानमंत्री का ख्वाब बहुत लोग देख रहे हैं और इसी लालच में देश के टुकड़े करने की राह पर निकल पड़े हैं। उनकी भाषा, सोच, कार्य और आत्मा इतनी गिर चुकी है कि उन्हें सत्ता स्वार्थ के आगे इंसानियत को ही दाव पर लगा दिया है। देश में नफरत के बीज बोकर कांटों के वृक्ष उगा रहे ये स्वार्थी, मौकापरस्त और अभद्रभाषी, देश की आने वाली पीढ़ि के जहन में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। कुछ हासिल न होगा, तो देश को बर्बाद करके ही दम लेगें। न जीएंगे और न जीने देंगे।
सनातन धर्म डेंगू है, राम का कोई अस्तित्व ही नहीं है, हिन्दू हिंसा करता है, एक दिन भारत में भी बांग्लादेश जैसा बहसी ताण्डव होगा, भारत तेरे टुकड़े होंगे, ये भाषा किसकी है? कौन लोग हैं ये, देश का अन्न खाने वाले, मिट्टी में पैदा होने वाले और देश की जनता के पैसे पर ऐश करने वाले, देश की पीठ में छुरा भोंकने वाले, जन मानस में नफरत का जहर घोलने वाले जहरीले इंसानी रूप में देश के दुश्मन ही और देशद्रोही ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेगा। ऐसी भाषा से तो शर्म को शर्मसार होने पड़ेगा, अगर कोई शर्मसार नहीं होगा, तो वो होगा बेशर्म देशद्रोही, जिसे विश्व गुरू भारत की पावन जनता एक दिन औकात दिखाने से पीछे नहीं हटेगी।
वेद प्रकाश शर्मा
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीति विश्लेषक हैं)






सत्य
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