MATHURA : बेसिक शिक्षा अधिकारी की छापेमारी में नपे शिक्षक
-अवकाश भी नहीं लिया फिर भी अनुपस्थित, मामला आया पकड़ में अब होगी कार्यवाही
मथुरा/फरह /देवेन्द्र शर्मा। बेसिक शिक्षा अधिकारी की सबसे खास बात है कि तीन-तीन ब्लाकों के विद्यालय का एक ही दिन में निरीक्षण कर लेते हैं। परिषदीय शिक्षक इस बात का अंदाज भी नहीं लगा पाते हैं,न जाने कब किस ब्लॉक में निरीक्षण के लिए पहुंच जाएं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने फरह ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय दौलतपुर, प्राथमिक विद्यालय महुअन प्रथम व द्वितीय का निरीक्षण किया। प्राथमिक विद्यालय दौलतपुर में 184 बच्चे नामांकित हैं, जबकि निरीक्षण के समय यहां मात्र 80 बच्चे उपस्थित पाए गए। विद्यालय में रंगाई -पुताई का भी आभाव पाया गया।
प्राथमिक विद्यालय महुअन प्रथम में प्रधानाध्यापक मोहन सिंह व सहायक अध्यापिका ममता अनुपस्थित पाए गए। इतना ही नहीं यहां सहायक अध्यापिका राधा चतुर्वेदी द्वारा निरीक्षण अधिकारी को गुमराह किए जाने की कोशिश की गई। यहां की स्थिति अत्यधिक गंभीर पाई गई। शौचालय भी क्षतिग्रस्त पाए गये। प्राथमिक विद्यालय महुअन द्वितीय में भी साफ -सफाई, रंगाई- पुताई नहीं पाई गई। यहां पठन-पाठन का स्तर भी न्यून पाया गया है।
शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हेतु बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से की अपील
अधिकारी को निरीक्षण के दौरान अधिकतर विद्यालयों में संतोषजनक स्थिति नहीं मिल रही है। जिसे शिक्षा अधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए शिक्षा में गुणवत्ता लाने हेतु जिला के सभी शिक्षकों से पत्र जारी कर अपील करते हुए कहा है कि प्रत्येक विद्यालय में 80 प्रतिशत छात्र -छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित हो, हर संभव विद्यालय को निपुण बनाने के प्रयास किए जाएं।
शिक्षण चक्र का पालन करते हुए न्यूनतम अधिगम स्तर की प्राप्ति के साथ-साथ 19 पैरामीटर पूर्ण करते हुए पोर्टल पर भी फीड किया जाएँ। शासन द्वारा निर्धारित टाइम एंड मोशन( 30 मिनट पहले विद्यालय खोला जाए एवं 30 मिनट बाद विद्यालय बंद किया जाए) आदि बिंदुओं को लेकर अपील की गई है। लेकिन देखना होगा कि शिक्षकों पर अपील का कितना प्रभाव कितने समय तक रहेगा। कुछ जगहों पर ग्रामीणों द्वारा शिक्षकों से समय पर आने जाने के लिए कहा जाता है तो शिक्षिकाएं ग्रामीणों को धमकाते हुए कार्यवाही करने एवं झूठे मामलों में फसाने की धमकी देने लगती हैं। शिक्षिकााएं साफ शब्दों में कहतीं हैं कि हम महिलाएं हैं हमसे जवान लडाने की जरूरत नहीं हैं। जो भी ग्रामीण हमसे समय पर आने जाने के लिए कहेगा हम उसको किसी मामले में फंसा देंगीं। क्या ऐसे हालातों को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आ पाएगी।





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