Agra News : श्रीराम के जन्मोत्सव पर मंदिर में बिखरा उल्लास
-राम जपते रहो, काम करते रहो,
-वक्त जीवन का, यूँ ही निकल जायेगा
-राजन जी महाराज की कथा में गूंजे जयघोष
मनोहर समाचार, आगरा। बल्केश्वर महादेव मंदिर पर इन दिनों श्रीराम भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है। जयघोष हो रहे हैं और भजनों में श्रद्धालु विमग्न हो रहे हैं। राम रस का पान करने को हर कोई लालायित है। श्री राम के सरस कथा वाचक राजन जी महाराज का अपना अलग ही आकर्षण है। उनका व्यक्तित्व और मधुर कंठ सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। बल्केश्वर महादेव मंदिर में कथा के तृतीय दिवस शुक्रवार को श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग सुना कर सभी को आल्हादित कर दिया।
राजन जी ने सुनाया
राम जपते रहो, काम करते रहो ।
वक्त जीवन का, यूँ ही निकल जायेगा।
अगर लगन सच्ची, भगवन से लग जायेगी ।
तेरे जीवन का नक्शा, बदल जायेगा।
राम जपते रहो, काम करते रहो।
इस भजन को सुनाते हुए राजन जी ने कहा कि जीवन में संतुष्ट होना जरूरी है। मन में भक्ति भाव के साथ कार्य करते रहिए l लेकिन जीवन में शांति जरूरी है ।अगर जीवन में शांति नहीं तो अरबों रुपया होना भी बेकार है।
उन्होंने कहा कि वटवृक्ष विश्वास का प्रतीक होता है। भगवान शंकर इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन,ध्यान करते थे। राजन जी कहते हैं कि वृक्ष के नीचे भजन करेंगे तो विश्वास बढ़ेगा।
राजन जी ने कहा कि भगवान श्रीराम के भक्त के गुण बताते हुए तुलसी दासजी कहते हैं
मम गुण गावत, पुलक शरीरा
गदगद जीयरा, नयन बह नीरा।
जो भी भगवान के गुण गाते हैं, उनके मन पुलकित हो उठता हैं। नेत्र सजल रहते हैं।
श्री राम जन्म का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राजा दशरथ अपने पुत्रों के जन्म की सूचना सुनकर मानो परम आनंद में समा गए। उनके मन में अतिशय प्रेम उत्पन्न हो गया। शरीर पुलकित हो गया। वे सोचने लगे कि जिनका नाम सुनने से ही कल्याण होता है, वही प्रभु मेरे घर आए हैं।
राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ को बुलवाया। वे ब्राह्मणों को साथ लिए राजद्वार पर आए। उन्होंने जाकर अनुपम बालक को देखा, जो रूप की राशि है और जिसके गुण कहने से समाप्त नहीं होते।
वहीं अयोध्या में खुशियां मनाई जाने लगीं। ध्वजा, पताका और तोरणों से नगर छा गया। जिस प्रकार से वह सजाया गया, उसका तो वर्णन ही नहीं हो सकता। आकाश से फूलों की वर्षा हो रही है, सब लोग ब्रह्मानंद में मग्न हैं। महिलाएं स्वर्ण कलश लेकर और थालों में मंगल द्रव्य भरकर गाती हुई राजद्वार में प्रवेश करती हैं।
महाराज ने ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी और उन सभी ने महाराज के पुत्रों को आशीर्वाद दिया। प्रजा-जनों को महाराज ने धन-धान्य और दरबारियों को रत्न, आभूषण भेंट दी। महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा।
कथा मे पदम् अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, मंजू मिश्रा, राजेश पाठक, रजनी गुप्ता, अविनाश मिश्रा ऋषि अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
भगवान के विकृत चित्र उतार फेंके
राजन जी महाराज ने कहा कि कई लोगों के घरों में शिला पर बैठे भगवान शंकर का चिलम पीते हुए फोटो लगा रहता है। भगवान राम के नाम से पूरा दिन व्यतीत करने वाले शंकरजी को चिलम पीने का समय ही कहां मिलेगा । उन्होंने कहा कि ऐसे चित्रों को नहीं लगाना चाहिए। जो चित्रकार है, उसके चित्त में जैसा विकार होगा वैसा ही चित्र बनाएगा। जिसके हृदय में कलुषित विचार होते हैं और उनकी भावनाएं वैसी ही चित्रित होती है, इसलिए प्रेरणाप्रद चित्र अपने घरों में लगाएं।








जय हो
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