AGRA : भक्त ध्रुव और प्रहलाद जी के चरित्र को सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर
आगरा। शमशाबाद रोड स्थित शिव वाटिका में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा में आचार्य श्री हरि ओम जी महाराज ने भक्त ध्रुव एवं भक्त प्रहलाद की कथा को सुना कर भारी संख्या में पधारे हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। प्रख्यात कथाव्यास आचार्य श्री राम नजर जी महाराज (पूज्य श्रीहरि जी महाराज) के सानिध्य में शिव वाटिका में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में सरस कथा व्यास आचार्य श्री हरिओम जी महाराज ने तीसरे दिन सर्वप्रथम सती माता के चरित्र का वर्णन किया
कथा में आचार्य जी ने भक्त ध्रुव जी महाराज के चरित्र का वर्णन किया आचार्य जी ने बताया "भक्त ध्रुव ने अपनी मौसी के वाणी रूपी बांणों से दुखी होकर अपनी मां सुनीति से आज्ञा लेकर मात्र 5 वर्ष की अवस्था में मधुबन में जाकर सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भीषण तप किया। मात्र 6 महीने की तपस्या में भगवान नारायण ने आकर ध्रुव जी को दर्शन दिया। भगवान के वरदान से ध्रुव जी महाराज ने 36000 वर्ष तक पृथ्वी पर शासन किया।
आचार्य जी ने ध्रुव जी की कथा के रहस्य को बताते हुए कहा "आज कलयुग में भी किसी के अंदर यदि सच्ची श्रद्धा और विश्वास हो, सच्चा समर्पण हो तो निश्चित ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है। आगे आचार्य जी ने पृथु चरित्र एवं जड़भरत जी के चरित्र का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया।
भक्त प्रहलाद जी का चरित्र वर्णन करते हुए आचार्य जी ने बताया "प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को हाथी के पैर के नीचे कुचलवाने का प्रयास किया। सांपों से डसवाने का प्रयास किया। पर्वत से फिकवाया, लेकिन प्रहलाद की दृढ़ भक्ति के कारण परमात्मा ने पग-पग पर प्रहलाद की रक्षा की। भक्त की रक्षा सदा भगवान करते हैं, जिसकी रक्षा भगवान करता है संसार की कोई शक्ति उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती।
आचार्य जी ने बताया "कल चतुर्थ दिन बामन अवतार, भगवान श्री राम का चरित्र व कृष्ण के जन्म नंद महोत्सव की कथा का वर्णन किया जाएगा। जिस प्रकार से वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण जन्म नंद महोत्सव मनाते हैं, उसी प्रकार से शिव वाटिका में नंद महोत्सव मनाया जाएगा। भक्तजनों से अधिक से अधिक संख्या में पधारने के लिए अपील की।
आज की कथा में राम गोपाल बित्थरिया, संजय उपाध्याय, कौशल शर्मा, विनोद शर्मा, हिमेश बित्थरिया, गणेश पलिया, कोमल शर्मा, रामदत्त लवानिया और महेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।



जय श्री राधे कृष्णा
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