AGRA : हर्षोल्लास के साथ मनाया श्री श्री रविशंकर जी का 68वां जन्मोत्सव

आगरा। आज के तकनीकी युग में मनुष्य क्रोध, तनाव, भय और निराशा से घिरता जा रहा है। इसका दुष्प्रभाव हमारी कार्यकुशलता तथा व्यक्तित्व पर पड़ता है। विभिन्न क्रियात्मक एवं शक्तिशाली कौशल और तकनीक-योग, प्राणायाम, श्वास व्यायाम के द्वारा इनसे उबरा जा सकता है। मनुष्य के स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिए व्यक्तित्व का विकास आवश्यक है। इसी उद्देश्य में निरंतर रत श्री श्री रविशंकर द्वारा संचालित संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के द्वारा सत्संग एवं संगीत संध्याओं का आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा श्री श्री रविशंकर जी के 68वें जन्मोत्सव के अवसर पर "भावपूर्ण सत्संग 'तेरा मैं" एवं संगीतमयी संध्या का आयोजन राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम, आर.बी.एस. कॉलेज, खंदारी, आगरा में किया गया। 

सत्संग का उद्देश्य मनुष्य को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए, व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रश्मि मिश्रा ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के डॉ. सुशील गुप्ता ( निदेशक , प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल एवं एपेक्स मेंबर, उत्तर प्रदेश वेस्ट, द आर्ट ऑफ लिविंग ),  निदेशिका सुनीता गुप्ता, युवराज अंबरीश पाल सिंह, महेश शर्मा, पूरन डावर, सुशील यादव, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. संध्या अग्रवाल, डॉ. बी.एम. अग्रवाल, डॉ. पायल, डॉ. संजय टंडन,  डॉ. आशा टंडन, डॉ. कपूर एवं समस्त उपस्थित भक्तजन का हार्दिक अभिनंदन किया।

सत्संग के प्रारंभ में भजन गायकगण सीमा चावला, डॉ. नारायणी एवं अजय चावला के द्वारा गणेश वंदना से आरंभ हुए भक्ति रस से सराबोर भजनों ने सभी को आत्मविभोर किया। सत्संग के श्रवण से सभागार में उपस्थित सभी लोगों को परमानंद की अनुभूति हुई। सत्संग से सभी ने सीखा कि जीवन पर तनाव से होने वाले प्रभाव से व्यक्ति अपरिचित रहता है। 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मिलन मेहता राज्य शिक्षक समन्वयक यूपी वेस्ट ने कहा कि "आज हम गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का 68वाँ जन्मोत्सव पावन जगत में पावन श्रद्धा के साथ मना रहे हैं। विश्व के कोने-कोने में लाखों लोग गुरुदेव के ज्ञान का लाभ पाकर सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गुरुदेव कहते हैं कि हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान है, यही उनकी कमाई है। आज जीवन जीने की कला 180 से अधिक देशों तक पहुँच चुकी है, जो  ज्ञान व शांति के कार्य में निरंतर कार्यरत है।"

सत्संग का आनंद लेकर सभी ने प्रसन्नता पूर्वक एक दूसरे को चंदन का तिलक कर गुरुदेव के जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देकर अपनी प्रसन्नता प्रकट की। सभी ने जीवन जीने के लिए प्रेरणा प्राप्त की और तनाव दूर करने के उपाय, आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी करने, एकाग्रचित्त मन,भावनाओं पर नियंत्रण, रिश्तों में सुधार लाने, अच्छा स्वास्थ्य पाने, जीवन जीने की कला के साथ खुश रहने की कला सीखकर लाभान्वित हुए। 

अंत में डॉ. सुशील गुप्ता ने सभी उपस्थितगण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "आजकल के तनावपूर्ण जीवन में गुरुदेव के आदर्शों पर चलना नितांत आवश्यक है और बहुत जरूरी है कि आत्मिक शांति हेतु हम गुरुदेव द्वारा निर्मित पाठ्यक्रमों का अभ्यास व अध्ययन करें।"

सत्संग में उपस्थित होकर जनसाधारण ने भक्ति रस से उन मधुर क्षणों को अविस्मरणीय बनाया एवं स्वादिष्ट प्रसाद का आनंद उठाया।



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