Manohar Samachar : सुप्रीम फटकार के बाद, क्या ये सेना से माफी मागेंगे

-अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे राहुल

-वीर सावरकर पर, कभी सिविल, कभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोट से फटकार

कहते हैं, गाल बजाने और जीभ चलाने में कोई खर्चा नहीं होता। बहुत सारे लोग इस कला में निपुणता हासिल किए हुए आपको मिल जाएंगे। जो जीवन भर गाल बजाने और जीभ चलाने में महारत हासिल कर उसका उपयोग करते रहते हैं। ऐसे हैं हमारे राहुल गांधी, जिन्हें महाज्ञानी कहें, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनके ज्ञान पर समूचा देश चटकारे लेता है। लेकिन उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें तो अपनी लाइफ में एन्जॉय करना है। अब पार्टी के और चहेते अंध विश्वासी राहुल गांधी की बातों को न मानें भला ऐसे कैसे हो सकता है? आखिर, राहुल उनके अन्नदाता, भाग्य विधाता और गुरू जो हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने चीन के कब्जे और सेना पर दिए अनर्गल बयान पर जहां उन्हें कड़ी और बड़ी नसीहत दी है। लेकिन उन्हें ऐसी बेइज्जती से फर्क नहीं पड़ता। ऐसे झटके और फटके उन्हें देश का विरोध करने की शक्ति प्रदान करते हैं। हंसी तो उन लोगों पर आती है, जो ऐसे विश्व ज्ञानी की बातों पर यकीन कर अपना समूचा जीवन बर्बाद कर रहे हैं और उम्मीद पाले हैं कि ये विदेशी मानव एक दिन प्रधानमंत्री बनेगा। भइया पहले इसका संस्कार तो करवा लो। कुछ ही सालों में बन्दा सीनियर सिटीजन बन जाएगा। 

खैर, ये तो सब चलता रहेगा, क्योंकि खिसियायी बिल्ली खम्बा ही नोंचेगी। वो भला हो कि इण्डिया गठबन्धन बन गया, जिसके रहमो करम पर कांग्रेस को 99 सीट मिल गईं। वर्ना अकेले राहुल के भरोसे तो कांग्रेस 10 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाती। ये कटु सत्य है, जिसकी गलतफहमी में राहुल जी रहे हैं और पार्टी को घुमा रहे हैं कि कांग्रेस ने 99 सीट जीत ली। बड़ी बिडम्बना है। कौन समझाए?

चलो, असली मुद्दे पर आते हैं और मुद्दा है देश विरोधी गाज बजाने का, जिसका प्रतिफल सुप्रीम कोर्ट के जज साहब ने अच्छी तरह समझा दिया। चीन और पाकिस्तान की भक्ति में लीन राहुल गांधी कभी देश की भक्ति तो करने से रहे। इसके पीछे कारणों की बड़ी लम्बी फेहरिस्त है। अगर राहुल सुधरे तो ठीक, न सुधरे तो ठीक, देश की जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता उनकी बातों को सीरियसली लेता कौन है, सिवाय पार्टी और उनके अंध विश्वासियों के, जो मुट्ठी भर हैं। कोर्ट की अवमानना, सेना का विरोध, दुश्मनों का पक्ष लेना, हर काम का विरोध करना, ऐसी पढ़ाई और ज्ञान प्राप्त कर पार्टी और अंध भक्तों को अपने इशारों पर नचाने वाले जल्द सीनियर सिटीजन के रेसर युवा नेता यूं ही देश की जनता को अपनी कॉमेडी और हवा-हवाई ज्ञान से हंसाते रहें, यही सबकी हसरत है।  

वेद प्रकाश शर्मा

(स्वतंत्र पत्रकार)




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