chun chotta

नीद में बेसुध सोए थे
सपनों में सब खोए थे
चोर घुसा घर में आकर
खिन्न हुआ कुछ ना पाकर
मेरा सा ही ये घर है
कोरा निरा फटीचर है
कुछ भी हाथ नहीं लगना
मुश्किल है रीता भगना
तवा चिमटा फूकना लू
आटे से थेला भर लू
भर कर घर से भाग चला
गश्त देता सिपाही मिला
दिखा क्या है पोटरी में 
बंद करू जेल कोठरी में 
कांप कांप तब चोर रहा
क्षमा कीजिये उसने कहा
लौटा दूंगा सौदा सट्टा
में तो हू बस चून चोट्टा



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